कामदा एकादशी: महत्व, व्रत कथा, विधि एवं पारण

कामदा एकादशी हिन्दू धर्म की एक अत्यंत पावन तिथि है, जो चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है। यह वर्ष की पहली एकादशी होती है, और इसका विशेष महत्व माना गया है। यह व्रत विशेष रूप से मनोकामनाओं की पूर्ति और पापों से मुक्ति के लिए रखा जाता है।

कामदा एकादशी का धार्मिक महत्व

कामदा एकादशी व्रत का उल्लेख पुराणों में मिलता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत करने से व्यक्ति को सभी प्रकार के पापों से छुटकारा मिलता है और अभीष्ट फल की प्राप्ति होती है। यह व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए फलदायी है, जो अपने जीवन से किसी दोष या श्राप से मुक्त होना चाहते हैं। भगवान विष्णु की कृपा से जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती है।


कामदा एकादशी व्रत कथा

पुराणों के अनुसार, प्राचीन काल में रत्नपुर नगर में पुंडरीक नामक राजा राज्य करता था। वहाँ गंधर्व, अप्सराएँ और किन्नर निवास करते थे। एक गंधर्व गायक ललित और उसकी पत्नी ललिता एक-दूसरे से अत्यंत प्रेम करते थे।

एक बार राजा के दरबार में गाते समय ललित का ध्यान ललिता में लगा रहा, जिससे उसका गान बिगड़ गया। क्रोधित होकर राजा ने उसे पिशाच बनने का श्राप दे दिया। वह विकराल रूप लेकर जंगलों में भटकने लगा।

ललिता अत्यंत व्यथित हुई और ऋषि श्रृंगी से उपाय पूछा। ऋषि ने उसे कामदा एकादशी व्रत करने का सुझाव दिया। ललिता ने पूरे श्रद्धा और विधिपूर्वक व्रत किया। व्रत के पुण्य प्रभाव से ललित को पिशाच योनि से मुक्ति मिल गई और वह पुनः गंधर्व रूप में लौट आया।

कामदा एकादशी व्रत विधि

1. पूर्व रात्रि में तैयारी: व्रत से एक दिन पहले सात्विक भोजन करें और भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए सोएँ।

2. प्रातः स्नान और संकल्प: एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर व्रत का संकल्प लें।

3. पूजन विधि:

भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र के समक्ष दीप जलाएँ।

धूप, अक्षत, पुष्प, पंचामृत, तुलसी दल आदि से पूजन करें।

“गुरु प्रदत्त मंत्र/नाम” का जाप करें। यदि गुरु शरणागति नहीं हुई हो तो साधक अपनी रुचि अनुसार नाम जाप करें।

4. व्रत का पालन:

दिन भर उपवास रखें (निर्जला या फलाहारी)।

किसी को बुरा न कहें, नकारात्मक विचारों से बचें।

5. रात्रि जागरण:

रात्रि में भगवान का भजन-कीर्तन करें, कथा पढ़ें या सुनें।

कामदा एकादशी पारण विधि (द्वादशी के दिन)

पारण का समय: द्वादशी तिथि में सूर्योदय के बाद उचित मुहूर्त में पारण करना चाहिए।

पारण से पूर्व: भगवान विष्णु को नैवेद्य अर्पित करें, तुलसी पत्र चढ़ाएँ।

दान-दक्षिणा: ब्राह्मणों को अन्न, वस्त्र, दक्षिणा दें।

अंत में: स्वयं अन्न-जल ग्रहण करें और व्रत पूर्ण करें।

उपसंहार

कामदा एकादशी व्रत केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और ईश्वर भक्ति का महान अवसर है। यह व्रत श्रद्धा, संयम और विश्वास से किया जाए, तो निश्चित ही व्यक्ति को जीवन के हर क्षेत्र में सकारात्मक परिणाम प्राप्त होते हैं।

यदि आप इस साल की कामदा एकादशी की तिथि, शुभ मुहूर्त और पारण का समय जानना चाहते हैं, तो कमेंट या संदेश के माध्यम से पूछ सकते हैं।

॥हरि: शरणम्॥

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