“श्री सदगुरुदेवाय नमः”
हनुमान जन्मोत्सव हिंदू धर्म में आस्था और भक्ति का प्रतीक एक प्रमुख पर्व है, जो भगवान हनुमान के जन्म दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व विशेष रूप से चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को मनाया जाता है, जो आमतौर पर मार्च या अप्रैल माह में आता है। हालांकि भारत के विभिन्न क्षेत्रों में यह पर्व अलग-अलग तिथियों पर मनाया जाता है, फिर भी चैत्र पूर्णिमा को मनाया जाने वाला हनुमान जयंती सबसे व्यापक रूप से प्रचलित है।
हनुमान जी का जन्म – एक दिव्य कथा:
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, हनुमान जी को पवन पुत्र कहा जाता है क्योंकि उनका जन्म वायु देव की कृपा से हुआ था। उनकी माता का नाम अंजना था, जो एक अप्सरा थीं और शापवश पृथ्वी पर जन्मी थीं। उनके पिता केसरी किष्किंधा के वानरराज थे। एक दिन अंजना तपस्या में लीन थीं, उसी समय दशरथ के यज्ञ का पायस (जिससे राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न का जन्म हुआ था) आकाश से उड़ता हुआ उनके पास पहुंचा। वायु देव ने उस पायस को अंजना तक पहुंचाया और उसी के प्रभाव से अंजना ने हनुमान जी को जन्म दिया। इस कारण हनुमान को “मारुति”, “पवनपुत्र”, और “अंजनेय” जैसे नामों से भी जाना जाता है।
हनुमान जी का बाल्यकाल:
हनुमान का बाल्यकाल अत्यंत चमत्कारी और रोमांचक रहा। बालक हनुमान ने बाल्यकाल में ही सूर्य को फल समझ कर निगल लिया था, जिससे सम्पूर्ण ब्रह्मांड में अंधकार छा गया था। देवताओं की प्रार्थना पर भगवान इंद्र ने उन्हें वज्र से प्रहार किया, जिससे उनका जबड़ा टूट गया और तब से उन्हें “हनुमान” (हन्न = जबड़ा, मान = सम्मान) कहा जाने लगा।
हनुमान जी ने भगवान सूर्य को अपना गुरु बनाया और उनसे वेद-शास्त्रों की शिक्षा प्राप्त की। वे परम बलशाली, बुद्धिमान और भक्तों के दुखों को हरने वाले देवता माने जाते हैं। उनका चरित्र रामायण और महाभारत दोनों में दिव्य रूप से वर्णित है।
हनुमान जन्मोत्सव की परंपराएँ:
हनुमान जयंती के दिन भक्त प्रातःकाल उठकर स्नान आदि करके व्रत रखते हैं। मंदिरों में विशेष पूजा, हनुमान चालीसा का पाठ, सुंदरकांड का पाठ और भजन-कीर्तन का आयोजन होता है। कई स्थानों पर शोभा यात्राएँ और अखाड़ों द्वारा मार्शल आर्ट प्रदर्शन भी किए जाते हैं। हनुमान जी को सिंदूर और चमेली का तेल अर्पित करना विशेष रूप से शुभ माना जाता है।
आध्यात्मिक महत्त्व:
हनुमान जी को भक्ति, सेवा और शक्ति का प्रतीक माना जाता है। वे ऐसे देवता हैं जिनका आह्वान करने से डर, भय, रोग, शत्रु और नकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाती है। रामभक्त हनुमान को कलियुग का जागृत देवता भी माना गया है, जो सच्चे मन से भक्ति करने वाले हर भक्त की रक्षा करते हैं।
निष्कर्ष:
हनुमान जन्मोत्सव न केवल भगवान हनुमान की लीलाओं और महिमा को स्मरण करने का अवसर है, बल्कि यह दिन आत्मबल, सेवा, और ईश्वरभक्ति के मार्ग पर चलने की प्रेरणा भी देता है। इस दिन श्रद्धालु भगवान हनुमान से बल, बुद्धि और विजय की कामना करते हैं और उनके आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लेते हैं।
॥हरि: शरणम्॥