श्रीमद्भगवद्गीता रसामृत – (श्रीमद्भगवद्गीता – अध्याय 1, श्लोक 9)

॥श्रीसदगुरुदेवाय नमः॥

श्री वृंदावन बिहारी लाल की जय! राधे राधे!

श्रीमद्भगवद्गीता रसामृत श्रृंखला में आज हम श्रीमद्भगवद्गीता जी के अध्याय 1 के श्लोक 9 के अर्थ, भाव एवं शिक्षा इत्यादि के बारे में चर्चा करेंगे।

श्लोक 1.9

अनेकशः शूरा: मदर्थे त्यक्तजीविता:

नानाशस्त्रप्रहरणा: सर्वे युद्धविशारदा:॥

श्लोक का संस्कृत में अर्थ

(वे) बहुत से शूरवीर, जो मेरी खातिर अपने जीवन को त्यागने को तैयार हैं,

अनेक प्रकार के शस्त्रों से सुसज्जित हैं और युद्ध की कला में निपुण हैं।

भावार्थ

इस श्लोक में दुर्योधन अपने गुरु द्रोणाचार्य को बताता है कि उसके पक्ष में अनेक ऐसे पराक्रमी योद्धा हैं जो उसके लिए अपने प्राणों का भी त्याग करने को तैयार हैं। वे सभी विभिन्न प्रकार के शस्त्रों से सज्जित हैं और युद्ध में अत्यंत निपुण हैं। इससे दुर्योधन अपने पक्ष की शक्ति और समर्पण को दर्शाना चाहता है।

शिक्षा

  • जीवन में लक्ष्य की प्राप्ति हेतु समर्पण और साहस बहुत आवश्यक गुण हैं।
  • किसी भी कार्य में सफलता के लिए निपुणता (विशेष ज्ञान) और संसाधनों का सही प्रयोग आवश्यक है।
  • नेता को अपनी टीम पर विश्वास रखना चाहिए, तभी वह प्रेरित होकर आगे बढ़ती है।

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धन्यवाद!

॥हरि: शरणम्॥

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